Vaccination chart for children: Hindi. टीकाकरण: हिन्दी में ( क्या ? कब? क्यूँ? कैंसे?)

जागरूक  माता पिता या अभिभावक अपने बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए सदैव सजग व प्रयासरत  रहते हैं । वह उन सभी साधनों का प्रयोग करता है, जिससे बच्चे उत्तम व निरोगी रहे । जैंसा कि कहा भी गया है –
उत्तम शरीर में ही उत्तम मस्तिस्क का विकास होता है ।
         यदि शिशुओं की बात करे तो उनका पूरा खयाल रखना माता पिता, परिवार समेत समाज की जिम्मेदारी है ।
इसलिए आवश्यक हो जाता है कि हम प्रत्येक बच्चे का टीकाकरण करवा कर समाज से जानलेवा बिमारियों को जड़ से समाप्त करने के लिए तत्पर रहें ।
        प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से बीमारियां शिशुओं को जल्दी घेर लेती हैं ऐसे में माता पिता अभिभावक का दायित्व हो जाता है कि उनमें जरूरी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए टीकाकरण करवाएं।

टीकाकरण क्या है ?

टीकाकरण, कुछ घातक व जानलेवा बीमारियों के प्रति शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए की गई प्रक्रिया है । जिसके  द्वारा शरीर में बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है ।

टीकाकरण के द्वारा हम बच्चों को उन खतरनाक बीमारियों से बचाते हैं जिसके कारण बच्चे को जानलेवा शारीरिक व मानसिक आघात पहुंच सकता है।
       भारत में टीकाकरण नीति की शुरुआत 1975 में की गई थी जिसे 1985 में यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम UIP नाम रखकर संपूर्ण भारत में लागू किया गया।

टीकाकरण क्यूँ जरूरी है?

  • गर्भावस्था में माँ और बच्चे की सुरक्षा के लिए ।
  • सुरक्षित प्रसव के लिए ।
  • बच्चे की रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ।
  • संक्रामक बीमारीयों को फैलने से रोकने, या जड़ से खत्म करने के लिए ।

टीकाकरण से कौन कौन सी बिमारियों से कैंसे बचाता है?

डिप्थेरिया ( Diptheria ) – 

इसे गलाघोंटू  बीमारी भी कहते हैं । कोरिनेबैक्टीरियम बैक्टीरिया के  संक्रमण द्वारा के कारण श्वास नली में झिल्ली बन जाती है जिससे कि सांस लेने में परेशानी आती है। इस बीमारी से बचने के लिए डीपीटी का टीकाकरण किया जाता है यह संक्रामक रोग है अतः एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।

काली खाँसी (Pertusis  or wooping cough) –

इस बिमारी से ग्रसित व्यक्ति की खांसते समय आवाज़ कुत्ते की भोंकने की तरह आती है अत: इसे कुकुर खांसी के रूप में भी जाना जाता है। यह haemophilus pertussis bacteria के कारण होता है । यह श्वसन तंत्र की प्रणाली को प्रभावित करता है । यह भी संक्रमित बीमारी है । इससे बचाव के लिए DPT का टीका लगाया जाता है ।

टिटेनस ( Tetanus )

Tetanus को धनुषटंकार रोग भी कहते हैं । क्योंकि इसमें शरीर धनुष की तरह ऐंठ जाता है । यह बिमारी Clostridium tetani bacterium की वजह से होती है । इस बिमारी में जबड़ा , गरदन या मांसपेशियां अकड़ जाती हैं । इसका टीका मां और बच्चे को मांस पेशियों में अकड़न की वजह से नवजात शिशु के साथ कोई अनहोनी घटना ना घटे इस से बचाता है। इसके लिए टिटेनस T.T. का टीका प्रयोग होता है ।

रोटावायरस ( Rotavirus ) –

रोटावायरस यह एक संक्रमित रोग है जिसके कारण बच्चों में डायरिया की शिकायत होती है। इसके कारण बुखार, पेट में दर्द, जी मिचलाना, दस्त, उल्टी होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं इसके कारण आतों में रुकावट तथा बच्चों में पाचन शक्ति का भी कमजोर हो जाना होता है। जिसके लिए रोटावायरस टीके का प्रयोग किया जाता है। यह वैक्सीन पोलियो वैक्सीन की तरह मुंह में बूंद के द्वारा पिलाई जाती है।

Measles, Mumps, Rubella ( MMR )

खसरा ( measles )

• खसरे के वायरस से ददोरा, खांसी, नाक बहना, आंखों में जलन, और बुखार होते हैं।
• इसके कारण कानों का संक्रमण, निमोनिया, दौरेआना (झटकेऔर घूरती आंखें),
दिमाग को नुकसान, और मौत हो सकते हैं।

मंप्‍स ( Mumps )

• मंप्‍स के वायरस के कारण बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, भूख न लगना
और ग्रंथियों में सूजन आने की घटनाएं होती है।
• इसके कारण बधिरपन, मेनिन्‍जाइटिस (दिमाग और मेरुरज्‍जु के खोल का
संक्रमण), वृषणोंअथवा अंडाशय में दर्दयुक्‍त सूजन होती है, और बहुत विरल
मामलों में बांझपन हो सकता है।

रूबेल (Rubella, जर्मन खसरा)

• रूबेल के कारण ददोरे, आथ्राइटिस (अधिकाशंत: महिलाओं में), और हल्‍का
बुखार होता है।
• यदि किसी महिला को रूबेल होता हैऔर वह गर्भवती है तो उसका गर्भपात हो
सकता है अथवा उसकेबच्‍चे का जन्‍म गंभीर जन्‍म जात दोषों के साथ हो सकता है।

इन तीनों ही बिमारियों ( Measles, Mumps, Rubella ) से बचाव के लिए MMRका टीका लगाया जाता है।

न्यूमोकोकल संक्रमण ( PCV   pneumococcal conjugate Vaccines ) –

PCV  ( pneumococal conjugate Vaccines ) न्यूमोकोकल संक्रमण, बीमारियों की एक व्यापक श्रृंखला का प्रतिनिधित्व करता है जो स्ट्रैपटोकोकस निमोनिया (एस. निमोनिया / निमोकोकस) की वजह से होता है।
एस. निमोनिया से विभिन्न बीमारियां हो सकती हैं, जिनमें शामिल है:
दिमागी बुखार (मैनिंजाइटिस): यह न्यूमोकोकल संक्रमण का एक गंभीर प्रकार है और यह आमतौर पर बुखार, गर्दन में अकड़न और मानसिक भ्रम के साथ होता है जिससे दीर्घकालिक समस्याएं हो सकती हैं जैसे सुनाई न देना अथवा मृत्यु आदि ।
निमोनिया : यह आमतौर पर बुखार, सांस फूलने, ठंड लगने और बलगम युक्त खांसी के साथ होता है और गंभीर मामलों में इससे मौत भी हो सकती है.
मध्यकर्णशोथ (ओटिटिस मीडिया ) : यह बुखार, स्राव अथवा बिना स्राव के कान दर्द के साथ होता है और बार-बार होने वाले मामलों में श्रवण शक्ति समाप्त हो सकती है।
इसके लिए PCV का टीका लगाया जाता है ।

पोलियो ( POLIO ) –

पोलियो का टीका आपके शिशु की पोलियो या पोलियोमायलाइटिस से सुरक्षा करता है। पोलियो एक गंभीर संक्रामक विषाणुजनित रोग है, जो कि संक्रमित व्यक्ति के मल के द्वारा फैलता है। पोलियो का विषाणु मुंह के जरिये शरीर में प्रवेश करता है और हमारे तंत्रिका तंत्र तक पहुंच जाता है। यह काफी तेजी से लकवे या फिर मौत का कारण बन सकता है। पोलियो से बचाव के लिए इसका टीका दिया जाता है । जो मुँह के द्वारा OPV या injection ke द्वारा IPV के रूप में दिया जा सकता है ।

टी0 बी0 (T.B. )  

TB   ( यक्ष्मा ) यह भी संक्रमण से फैलने वाली श्वसन तंत्र की बिमारी है । जिसमें बुखार, भूख न लगना, व कमजोरी आ जाती है । TB से बचाव के लिए  बीसीजी टीका (BCG) जिसका पूरा रूप Bacillus Calmette Guerin है , का प्रयोग किया जाता है। स्वस्थ शिशुओं को जितना संभव हो उतना जन्म के पश्चात यह टीका दिया जाना चाहिए। ताकि वे TB के खिलाफ प्रतिरक्षा बढ़ा सकें।

हेपेटाईटिस बी ( Hepatitis B )

हेपेटाईटिस बी दुनिया का सबसे अधिक सामान्य लीवर / यकृत का संक्रमण है। यह हेपेटाईटिस बी वाईरस (HBV) के कारण होता है, जो लीवर/यकृत पर हमला करते है और उसे नुकसान पहुँचाता है। यह रक्त द्वारा, असुरक्षित यौन संबंध द्वारा, दूसरों के लिए उपयोग की गई सूई या एक ही सुई कई लोगों के लिए उपयोग में लाई जाए उस से और संक्रमित माता द्वारा नवजात शीशु में, गर्भावस्था के दौरान या प्रसूति के दौरान हस्तांतरित होती है । इसके लिए Hepatitis B  का टीका प्रयोग में लाया जाता है ।

हीमोफ़िलस इन्फ़्लुएंज़ा टाइप बी ( Haemophilus influenzae type b, Hib )

Hib यह संक्रमण को बढ़ाने वाला bacterium है । इसके द्वारा मेनिंजाइटिस, न्युमोनिया, सेल्युलाइटिस (त्वचा का संक्रमण), सेप्टिक अर्थराइटिस (जोड़ों का संक्रमण) और एपोग्लोटाइटिस (एपोग्लोटाइटिस का संक्रमण, जिसके कारण श्वास नाल में अवरुद्ध होता है या बंद हो जाता है)। कुल मिलाकर, ये Hib-जनित संक्रमणों को आमतौर पर “Hib रोग” कहा जाता है। इसके लिये hib का टीका प्रयोग में लाया जाता है ।

टीकाकरण की समय सूची –

गर्भावस्था में गर्भवती महिलाओं के लिए

Vaccines   / ScheduleTetanus Toxoids (T.T.)Tick and Write Date
   
Early Pregnancy TT -1 
   
4 weeks After TT-1TT-2 
   
If received 2 TT doses in previous Pregnancy within a last 3 years  thenTT – Booster 

बच्चों में टीकाकरण चार्ट

Schedule                             Vaccines
 
Within 24 hours after Child Birth(BCG ) ( HEP B-1) ( OPV -0)
 
6 Weeks of Child( HEP B-2 )  (  IPV-1** ) (  DPT -1 ) ( Rota-1) ( Hib -1) (PCV-1)
 
10 weeks(HEP B-3) (IPV -2**) (DPT-2) (Rota -2) (Hib -2 ) (PCV -2)
 
14 weeks(HEP B 4*) (IPV -3**) (DPT -3) (Rota -3****) (Hib-3) (PCV -3)
 
6 MonthsTyphoid Conjugate vaccine TCV(9-12 months)#
 
9 Months(MMR-1) ( MCV-1 )
 
12 Months( HEP A-1) ( MCV-2)  ( JE-1 ) & Cholera (1,2)
 
13 Months( JE-2 )
 
15 Months(MMR-2 ) ( PCV-B 1) ( Varicella -1)
 
16 to 18 months( HEP – A2****** ) ( IPV-B1***B1 ) ( DPwT B1/DTaP B1 ) ( Hib- B1 type )
 
2 to 3 yearsMCV
 
4 to 6 years( DPwT B2/DTaP B2 ) ( MMR-3/ MMRV ) ( Varicella -2 )
 
9 to 14 years( PCV ) ( Tdap/Td ) &  ( Human Pappiloma Virus ,HPV1,2)
 
15 to 18 yearsTd &HPV1,2,3
Indian Academy of Pediatrics ( IAP ) schedule (2018-19)

*fourth dose of Hepatitis B permissible for combination vaccines only.

**in case IPV is not available or feasible, the child should be offered bOPV(3doses). In such cases, give two fractional doses of IPV at 6 weeksand 14 weeks.

***b-OPV, if IPV booster (standalone or combination)not feasible.

****Third dose not required for RV1. Catch up up to 1 year of age in UIP scheduled.

*****live attenuated Hepatitis A vaccine: single Dose Only.

******Begin influenza vaccination after 6 months of age, about 2-4 weeks before session; give 2 doses at the interval of 4 weeks during 1st year and then single dose yearly till 5 years of age.

#TCV= Typhoid Conjugate vaccine, ##HPV= Human Papilloma virus

Meningococcal Vaccine ( MCV) : 9 months through 23 months: 2doses,at least 3 monthsapart; 2 years through 55 years; single dose only

JE= Japanese Encephalitis: For individual living in endemic areas& for travellers to JE endemic areas provided their expected stay is for a minimum period of 4 weeks.

HPV: 2 doses at 6 months interval 9-14 years age; 3 doses ( at 0, 1-2, & 6 months) 15 yearsor older and immuno compromised.

Cholera Vaccine: 2 doses 2 weeks apart for >1 year old; for individuals living in high endemic areas and travelling to areas where risk of transmission is very high.

Indian Academy of Pediatrics ( IAP ) schedule (2018-19)

टीकाकरण में सावधानियाँ –

  • टीका केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान, हॉस्पिटल के डॉक्टर या प्रशिक्षित स्टाफ से ही लगवाएं। लगाए गये टीकों की जानकारी कार्ड को सुरक्षित रखें । टीका लगाने से पहले अपने बाल चिकित्सक से परामर्श ले लें ।
  • यदि कोई टीका छूट गया है तो उसके बारे में भी विचार विमर्श कर ले ।
  • टीका लगाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि बच्चे को किसी तरह का बुखार या कोई और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी ना हो यदि ऐसा है तो चिकित्सक द्वारा परामर्श लेकर ही टीका लगवाएं।
  • टीका लगाने के बाद कुछ देर तक हॉस्पिटल में इंतजार करें क्योंकि किसी भी प्रकार की परेशानी को डॉक्टरी सलाह द्वारा सही ढंग से इलाज किया जा सकता है।
  • कई बार यह भी देखा गया है टीका संयुक्त उपलब्ध होता है, ऐसे में टीके में कौन-कौन से टिके संयुक्त है उसके बारे में जानकारी रखना जरूरी है।

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